हृदय रोग से निजात पाने के लिए असरदार घरेलु नुस्खे

हृदय रोग से निजात पाने के लिए असरदार घरेलु नुस्खे

हृदय उत्मांगो का एक शिरोमणि है जो की शरीर में तीन उत्मांग है। इसमें है  मष्तिष्क, हृदय और यकृत। लेकिन शरीर में जो स्थान हृदय को प्राप्त है वो और किसी को भी नहीं है। हृदय शरीर का सम्राट है। जैसा की हम जानते है मनुष्य और पशुओ का जीवन केवल हृदय पर ही आश्रित है। अगर हृदय रोगग्रस्त हो जाता है तब सारा का सारा शरीर भयग्रस्त हो जाता है। आज के लेख में हम कुछ ऐसे योग बताने जा रहे है जो कि कुछ पैसो में तैयार हो सकते है। एवं बड़े बड़े मूल्यवान योगो से उत्तम प्रभाव  दिखाते है।

ह्रत्कम्प – संजीवनी

यह ऐसा रोग है जिसमे हृदय बहुत जोर जोर से धड़कता है। इस बीमारी में रोगी को ऐसा अनुभव होता है कि हृदय डूबता जा रहा है। आँखों के सामने अँधेरा सा छाया रहता है।  एवं किसी भय एवं क्रोध की दशा में अधिक धड़कने लगता है।

विधि

आवश्यकतानुसार सूखा आंवला लेकर खूब बारीक कर ले। इसके बराबर मिश्री मिलाकर रख ले।  जब भी जरुरत पड़े तब प्रातः समय निराहार मुख ग्राम की मात्रा प्रतिदिन पानी के साथ दिया करे। ऐसा करने पर कुछ ही दिनों में हृदय के सभी रोग दूर हो जाएगे। यह बहुत ही सरल और अनुपम योग है।  इससे हृदय की दुर्बलता, ह्र्त्कम्प ,दोष और चेतना सुन्य इत्यादि रोगों के लिए हितकारी है |

अन्य योग

यह योग भी अपने गुणों में अद्धितीय है और एक सप्ताह के सेवन से हृदय का ताप, हृदय दुर्बलता इत्यादि रोग दूर होकर पूरा आराम हो जाता है।

विधि

इसके लिए रेंहा के बीज 5 ग्राम ले ,रात के समय एक कूजे में डालकर ऊपर आधा किलो पानी डाले और रात भर बाहर हवा में पड़ा रहने दे। प्रातः  थोड़ा सा मीठा मिलाकर इसका सेवन करे। एक ही सप्ताह में आपका रोग मिटना शुरू हो जायेगा।

हृदय ताप नाशक

हृदय ताप नाशक रोग बहुत ही स्तुत्य है। हृदय के सभी रोगो के लिए एक मात्र और अनुभूत उपचार है। इसलिए अनेक बार का अनुभूत और परीक्षित है।

विधि

तरबूज के बीच २५ ग्राम रात के समय पानी में  भिगोकर रखे। प्रातः काल भलीभांति घोट पिस कर थोड़ी सी खांड मिलाए।  इसको कपडे से छान कर पिलाया करे। क्योकि इसके समक्ष अति मूल्यवान ओषधिया पानी भरती है।

हृदय पीड़ा

हृदय की पीड़ा बहुत ही भयंकर रोग होता है। हालांकि इसके लिए बहुत ही सरल और अनुभूत योग प्रस्तुत किया जा रहा है।

विधि

हिरन के सिंग का भीतरी भाग (गुदा) आवश्यकतानुसार ले | इसे एक मिटटी के कूजे में बंद करके आग में भस्म बना ले | इसको बारीक पीस ले और सावधानी से शीशी में डाल ले। जब भी जरुरत पड़े तब एक से दो ग्राम की मात्रा ठन्डे पानी के साथ में दिया करे।

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