सर्दियों के मौसम में पाए जोड़ो के दर्द से राहत! रखे इन 5 बातों का ध्यान

सर्दियों के मौसम में पाए जोड़ो के दर्द से राहत! रखे इन 5 बातों का ध्यान

आजकल ऐसे बहुत से लोग है जो कि जोड़ो के दर्द से झूझ रहे है। ऐसे में यह जोड़ो के दर्द सर्दियों में और मुश्किल पैदा कर देते है। ऑस्टियोआर्थराइटिस की स्थिति तब उत्पन्न हो जाती है जब आपके जोड़ो में उपस्थित कार्टिलेज धीरे धीरे क्षतिग्रस्त होने लगती है और इसी वजह से हड्डिया आपस में एक दूसरे से घिसने या फिर रगड़ने लगती है। इसी के फलस्वरूप जकड़न, जोड़ो में दर्द और गति में दिक्कत इत्यादि की समस्या पैदा होने लगती है।

रोजाना ज्वॉइंट में रोटेशन और जोड़ो में घुमाव होना

ऐसे कई सारी एक्टिविटी है जिनकी मदद से आप अपनी जीवनशैली में ज्वॉइंट रोटेशन को शामिल  कर सकते है।  जैसे की साइकिलिंग और तैराकी को शामिल कर सकते है। जब जोड़ो में यह घुमाव होगा तो आपको दर्द से राहत मिलेगी और स्थिति को बिगड़ने से रोकने में भी मदद मिलेगी। इसी के साथ ही वाकिंग से भी आपको बहुत फायदा मिल सकता है। वाकिंग करते समय एक बात का ध्यान रखे कि ज्यादा तेजी से ना चले और आरामदायक जूते पहनकर ही सैर पर निकले जिसकी सतह सामान हो।

अभ्यंग का अभ्यास करें

माना जाता है कि यह आयुर्वेद चिकित्सा का एक रूप है जिसमे औषधीय तेलों से पुरे के पुरे शरीर की मालिश की जाती है। ऐसा करने से एक तो वात की समस्या दूर होती है एवं दूसरी इससे उत्तकों से टोक्सिन को बाहर निकालने में मदद मिलती है। ऐसा करने के लिए आर्गेनिक तिल के तेल को गर्म करे और सिर से लेकर पाँव तक लगाए। रोजाना कम से कम दस मिनट तक मसाज करे। अगर आप रुमाटॉइट आर्थराइटिस से पीड़ित हैं तो अभ्यंग का अभ्यास न करे।

घी का सेवन

गठिया को एक ऐसे रोग के रूप में देखा जाता है जिसमें वात की अधिकता हो जाती है जिससे पूरे शरीर में नमी कम होने लगती है और इस वजह से चिकनाई में कमी होने लगती है. घी, तिल या जैतून के तेल के उपयोग से सूजन में राहत मिलती है, जोड़ों में चिकनाई पैदा होती है और जोड़ों में जकड़न कम होती है ।

योगा

जितना हो सके योग को अपनी जीवनशैली में शामिल करे। जैसे की ताड़ासन वीरभद्रासन और दंडासन से जोड़ो के दर्द से बहुत जल्दी राहत मिलती है और इससे गति में भी तेजी आती है।

उचित खानपान

अगर आप जोड़ो के दर्द से राहत पाना चाहते है तो उसके लिए उचित एवं संतुलित खानपान बेहद जरुरी है। ‘रक्ताशली’ और ‘शष्टिका’ जैसे अनाजों के सेवन से दर्द में बहुत राहत मिलती है। इस रोग में करेला, बैंगन, नीम और सहजन के डंठल का सेवन अधिक से अधिक करे एवं तमाम तरह के बेर और एवोकैडो भी जाकर खाए।

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