साउथ कोरिया ने अपने दुश्मन नॉर्थ कोरिया के साथ किया ऐसा सलूक

साउथ कोरिया ने अपने दुश्मन नॉर्थ कोरिया के साथ किया ऐसा सलूक

महाभारत के युध्द में कौरव और पांडव दिन भर लड़ते रहते थे। जैसे ही शाम ढलते थी युद्ध बंद हो जाता और घायलों और मृतकों को युद्धभूमि से उठाया जाता। दिन भर एक दूसरे को  मारने और मिटने वाले रात होते ही एक-दूसरे की मदद करते।  सूर्यास्त के बाद दोनों पक्ष के योद्धा आपस में मिलते। एक-दूसरे के शिविर में जाते। दोस्ती फिर जिंदा हो जाती।

जैसे ही सूर्योदय होता। शंखनाद होने के साथ रणभूमि सज जाती। ये कितनी हैरान करने वाली बात है ना? युद्ध तो समूल विनाश वाला होता  है। जो एक दूसरे के विनाश के लिए अड़ा रहता है।

कोरियन प्रायद्वीप,  1950 में उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया युद्ध हुआ, उसी समय रूस और अमेरिका के बीच शीत युद्ध चल रहा था। उसकी एक बिसात यहां भी बिछी थी।  उत्तर कोरिया ने करीब 75 हजार सैनिकों से साथ दक्षिण कोरिया पर धावा बोल दिया। दक्षिण कोरिया की मदद को अमेरिका आगे आया और उत्तर कोरिया की और सोवियत था।  इस युद्ध  से ऐसा लग रहा था मानो तीसरा विश्व युद्ध छिड़ गया, हालाँकि  ऐसा नहीं हुआ।  जुलाई 1953 में युद्ध खत्म हुआ।  कहने को तो युद्ध ख़त्म हो गया  लेकिन युद्ध की आहट कभी मंद नहीं हुई।  ऐसा लगता था   की युद्ध कभी भी छिड़ा सकता है।  अमेरिका उत्तर कोरिया को  परमाणु संकट से धमकाते-धमकाते थक गया था।  लेकिन उत्तर कोरिया  इन सब बातो से जानते हुए भी  अनजान बना रहा। वैसे इन सब बातो से सबसे ज्यादा परेशान दक्षिण कोरिया ही है। पड़ोसी जो है। फिर भी दक्षिण कोरिया ने कमाल कर दिखाया है।  ऐसी  इंसानियत दिखाई है कि दीया लेकर खोजने से भी मिसाल नहीं मिलेगी।

 

दुश्मन देश में रहने वाले जरूरतमंदों की करी मदद

उत्तर कोरिया में रहने वाली गर्भवती औरतों ओर बच्चों के लिए दक्षिण कोरिया ने करीब 52 करोड़ रुपये (8 मिलियन डॉलर) का सामान भेजने  का किया फैसला।  खाने -पीने की चीजें,  दवाइयां,  टीके, पौष्टिक सामान, किम जोंग उन इत्यादि। लेकिन उत्तर कोरिया का तानाशाह बस परमाणु हथियार हु उसे जरूरी लगता है।  उसे अमेरिका की नीयत पर भरोसा नहीं , ताकतवर होना चाहते है ताकि उस पर कोई  हमला करने की हिम्मत नहीं  कर सके।  इस चक्कर में सारा खर्च हथियारों पर ही कर देता है।  लेकिन  सरकार  को उसकी प्रथा के प्रति  कोई दायित्व नहीं दिखाई देता है।  की बस ये ही जिम्मेदारी है जैसे कोई भूखा मरता है, तो मरे!

लेकिन दक्षिण कोरिया के विनम्र  होने के कारण  उसे वहां की बदहाली  देखि नहीं जा सकती। दक्षिण कोरिया की सोच में , लड़ाई  आम लोग पीसे उसे ये मंजूर नहीं है।  वह आम लोगो की तकलीफ को नजर अंदाज नहीं कर सकता है।  यही कारण है की वो उत्तर कोरिया की मदद के लिए अपना हाथ बढ़ा रहा है।

source : thelallantop

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