कहीं बालों के गिरने और गंजेपन का कारण आपकी जीवनशैली तो नहीं है?

कहीं बालों के गिरने और गंजेपन का कारण आपकी जीवनशैली तो नहीं है?

अनियमित और अस्वस्थ खानपान के कारण और दिनों-दिन बढ़ते प्रदूषण आदि के कारण लोगों में बाल झड़ने की समस्या तेजी से बढ़ी है। आजकल छोटी उम्र में ही लोगों के बाल झड़ रहे हैं। इसी कारण युवावस्था में ही बहुत से लोग बूढ़े जैसे नजर आने लगते हैं। बालों के झड़ने की समस्या के कारण लोगों में गंजापन भी बढ़ा है। बालों के झड़ने के कई कारण हो सकते हैं। कई बार आनुवांशिक कारणों से भी बाल झड़ जाते हैं। इसके अलावा रक्त विकार, किसी विष का सेवन कर लेने से , उपदंश, दाद, एक्जिमा आदि के कारण भी ऐसा हो जाता है।

मामूली नहीं है समस्या

थोड़ा-बहुत गंजापन उनमें भी देखा जा सकता है जो इससे प्रभावित नहीं होते लेकिन बालों का गिर जाना किसी व्याक्ति के आत्म विश्वास और आत्म-प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाता है। हालांकि गंजापन जीवन के लिए कोई खतरनाक बीमारी नहीं है लेकिन मनोवैज्ञानिक कारणों से यह चिंता और व्याकुलता का कारण बनता है। गंजेपन से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण मसला यह है कि इससे आत्म‍-सम्मान में भारी गिरावट आती है विशेषकर मेल पैटर्न बाल्डनेस में जो शुरूआती अवस्था में होने पर भावनात्मक परेशानी का सबब बनता है और निजी तथा प्रोफेशनल दोनों प्रकार के जीवन को प्रभावित करता है। लगभग 40 प्रतिशत पुरूष बाल गिरने की समस्या  से पीड़ित होते हैं फिर भी इसे मामूली समस्या समझा जाता है और इससे पीड़ित लोग उपेक्षा महसूस करते हैं। चूंकि फीमेल पैटर्न बाल्डनेस में ज़्यादातर बाल विरल होते हैं और यह 30 से 40 की आयु में अपना असर दिखाता है, लेकिन यह पुरूषों की तरह दिखता नहीं हालांकि यह भी समान रूप से परेशान करने वाला होता है।

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बालों का गिरना और तनाव

बालों का गिरना पुरूषों और महिलाओं दोनों के लिए ही तनावपूर्ण है जिससे हीन भावना उत्पंन्न  होती है, आकर्षणहीनता का अहसास होता है और सामाजिक दूरी बनती है, आत्मप्रतिष्ठा और शारीरिक छवि धूमिल होती है और तनाव बढ़ता है। इन मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर व्यक्ति की उम्र, वैवाहिक स्थिति और बालों के गिरने की सीमा का असर पड़ता है। कई शोधों से भी इस बात का पता चला है कि तनाव होने से बाल गिरते हैं।

बालों के गिरने की समस्या से निपटना

दिखाई देने वाले बालों में एकाएक भारी परिवर्तनों का सामना करना काफी कठिन है विशेषकर जब ये व्यक्ति के नियंत्रण से बाहर हों, इसके बजाय इसे स्वीकार कर लेना ही आसान लगता है। बाल किसी व्यीक्ति का अभिन्न अंग नहीं होते बल्कि एक सकारात्मक नज़रिया और अच्छा व्यक्तित्व ही आपको आकर्षक बनाता है। यदि समस्‍या उपचार योग्य नहीं है तो अपना धैर्य न खोएं क्योंकि चिकित्सा जगत (मेडिकल फील्डप) में हो रहे नित नए विकास के साथ नई उम्मीदें कायम हैं। न ही हर किसी को बाल गिरने की समस्या को लेकर चिंतित होकर चिकित्सकीय सहायता ही लेनी चाहिए उन्हें  इस बाधा को पीछे छोड़कर जीवन का सामना करना सीखना चाहिए।

छवि की चिंता

मेल पैटर्न बाल्डतनेस से पीड़ित पुरूषों के डिप्रेशन और एन्जाईटी (अवसाद और हताशा) से ग्रस्त होने की संभावना अधिक रहती है यदि यह समस्या उनको शुरूआती उम्र में तब परेशान करे जब वे अपनी छवि को लेकर अत्यधिक कांशियस होते हैं। दिखावट में परिवर्तनों को लेकर हर किसी को भावनाओं के एक चक्र से गुजरना होता है जैसे नकारना, क्रोध, हल ढूंढना, अवसाद (हताशा) और स्वीपकार्यता। जब किसी व्यक्ति पर गंजेपन का पहला हल्का  सा असर होता है तो व्यक्ति इसे नकारता है क्योकि वह इसे स्वीककार करने में अक्षम होता है

गंजापन भी आजकल है फैशन

क्यों। नहीं? ब्रूस विलीज, सीन कॉनरी, विन डीज़ल, आंद्रे अगासी और ऐसे ही अनेक लोगों के बारे में सोचें, यह सूची अंतहीन है। ये सभी गंजे हैं लेकिन अपने क्षेत्रों में इनका दबदबा है! सिर पर बाल न होने या बहुत कम बाल होने के बावजूद उनमें वो अपील है जो उनके घने बालों वाले जोड़ीदार साथी नहीं अर्जित कर सके। शायद गंजापन ही उनकी प्रमुख खूबी है जो उनको औरों की तुलना में अलग तरह से आकर्षक बनाती है। होड़ से अलग हटते हुए गंजापन एक विकल्प नहीं बनाया जा सकता लेकिन स्वयं में एक विशिष्ट पसंद अवश्य हो सकता है। बाल गिरने की रोकथाम संबंधी प्रोडक्ट्स  और‍ रिस्टो्रेशन सर्जरी आदि पर दुनिया भर के लाखों लोग हजारों फूंक चुके हैं इस आशा में कि उनके बाल फिर से घने घुंघराले हो जाएंगे। हालांकि यह देखना भी बिल्कुल मजेदार है कि लोग किस तरह से अपना गंजापन छुपाने के लिए इसे ढंकने की तरकीबों का सहारा लेते हैं। हर व्यक्ति के लिए यह समझना समान रूप से महत्वपूर्ण है कि गंजेपन को स्वीकार करना अच्छा  विकल्प बन सकता है (और शायद ज़्यादा स्वास्थ्‍यप्रद विकल्प भी)। हेयर लॉस और बाल्ड्नेस (बालों का गिरना और गंजापन) किसी व्यक्ति की दिखावट में क्रमिक, लेकिन नाटकीय बदलाव लाता है जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। सामने वाले की दिखावट को लेकर चिंता प्रकट करना मानवीय प्रवृत्ति है और गंजेपन की स्थिति में यह और ज़्यादा होती है क्योंकि गंजे लोग बुजुर्ग, बोरियत भरे और पौरूषहीन माने जाते हैं वहीं दूसरी ओर उनको अधिक बुद्धिमान भी समझा जाता है। व्यूस्तत सड़कों पर घास नहीं उगती!

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